शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

मानो यह तो न्यायिक हिंसा हूई!

राज्य के उच्च न्यायालय ने कोपर्डी हत्याकांड के पक्ष मे न्याय देते यह साफ कह दिया कि अन्यायग्रस्त महिला चाहे वह नौकरपेशा हो,पारिवारीक व्यवस्था मे जि रही हो, चाहे वह बलात्कार जैसे घृणीत अपराध कि शिकार हो चाहे परिवार द्वारा पिडीत कि हो या अॅसिड हमले कि शिकार सरकार उसकी स्थिती को सुधारणे के लिएे जो भी मुहावजा देती उसमे समानता हो.

मुहावजा घोषित करते व्यक्त उसपर हूऐे अत्याचार कि तुलना के आधार पर मुहावजा देना अन्याय कारक होगा.

उच्च-न्यायालय राज्य के महिला व बालकल्याण विभाग से ऐैसे प्रतिज्ञा पत्र के द्वारा घोषणा मांगी.
तो वही राज्य के मंत्रीमंडल से भी घोषणा मांगी.
सभी का संदर्भ देते वक्त उच्च-न्यायालय ने गोवा का उदाहरण तथा १० लाख कि राशी के बारे मे कहॉ.
जिसमे राज्य मे पहले नोकरपेशा को १० लाख तथा पारिवारीक महिला को ५ लाख कि सुविधा रखी गयी थी.

निश्चित यह स्वागत के पात्र है जो कि समान योग्य न्याय के रास्ते पर का पहला कदम होगा.

“ हम राज्य के अॅडव्होकेट जनरल आशुतोष कुभकोणी का स्वागत करते हूऐ | सिर्फे इतना कहना चाहते है कि जब मुहावजे मे समानता ही दर्शानी है तो न्याय तथा समाज के अंदर हो रहे अपराध तथा जातिगत आधार पर हत्यायों पर न्याय समान क्यु नही.? ”

कोपर्डी हत्याकांड के परिणाम देखकर जो की सालो से लेकर चलाये जा रहे दलित हत्याकांड के न्यायालयिन केस को आज तक अंतिम निर्णय तक नही ले जाया गया. क्या वह उस समान न्याय तथा समानता के आधारित तंत्व वर सही कारगर हूएे.

:- दलित क्या पिडीत नही...?
:- क्या दलित लडके-लडकी कि हत्या जो कि जातीगत तथा द्वेष से कि गयी वह घृणास्पद नही..?
:- दलित कि हत्या कर देना, काट देना, जला देना जैसे तैसे स्थिती मे अपमानास्पद कर देने कि स्थिती को निर्माण करणा योग्य होगा.
:-दलित हर वक्त उस पिडा के हत्ये चढते आया जहा शासन-प्रशासन तथा न्यायिक स्थानको पर दुर रखा गया.
क्या यह राजनैतिक-सामाजिक और न्यायालियन हत्यायें नही है..?

दरसल सवाल उठते है और उठते आये है जहा रमाई नगर से चली आई रोहीत तक कि हत्याये हो या बिहार-युपी से लेकर अपराधीक मामले हो.
हम आज खर्डा के दिये न्यायालयीन निर्णय के तौर पर बोल सकते है.
कि आज तक राजनैतिक-सामाजिक हिंसाचार हि होता था. पर आज इस देश के

( रोहित वेमूला तथा जस्टिस्ट लोया के प्रकरण को भी देखा जाये तो )

यह एक नयी हिंसा कि तौर पर उभरकर आती है हा न्यायालयीन हिंसा जो सरकार के आदेश से कि जा रही है.

“ Nitin deprived of justice ”

#Judicialviolence