रविवार, 24 सितंबर 2017

मै कविता हू..!

सारे दुखों को शब्दो मे बटोरकर रखने वाली
                           मै कविता हू..!

मै कविता हू..! उन दुखों की जिने समाज-जाती-धर्म ने पैदा किया

मै कविता हू..! उन लम्हों की जो यातनायों से भरी गयी

मै कविता हू..! उन इंन्सानो कि जिन्हे दबे पाव रोंदा गया

मै कविता हू..! उन अत्याचारों से पिढीत लोगो कि जिन्हे मरने छोडा गया

मै कविता हू..! उस नारी की जिसे जलाया-काटा गया

मै कविता हू..! उस बच्चे कि जिसे जिने से रोका गया

मै कविता हू..! इस लिएे की मैने खिलाफत सिखाई | मैने इंन्सानो को इंन्सानियत सिखाई | मैने हक-अधिकार के बातो की याद दिलाई

इस लिएे की मै कविता हू..!
हा मै कविता हू..! आवाज हू..! मुझे जिने दो!

क्युकी...‘ मै महज शब्दो से रची किताबों मे हू ’

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इन शब्दों को समर्पित करता हू.
कवी ‘ पाश ’ को इस लिएे कि संघ-परिवार उनकी कविताये हद्दपार करना चाहता है.
जो युवायों कि बुलंद आवाज बनती जा रही है.

🚶____रोहीत__

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