मौंसम बदलते है, वैसे लोग बदलते है...
कितनों को देखा है, देख रहा हू..!
पहले ना था, अब हा है...
पहले कोन था.? अब पहचान है...
पहले खौफ था, अब साथ है...
पहले गैर था, अब हमारा है...
जित और हार के जश्न मे साथ हू कहते है.!
चार साल पहले यही तो हसते थे...
जो लहर के साथ चलता है, मानो कहर बरसते भाग जाता है..!
जो महफिंले सजाने चले आते है, रौनक उतरते ही लौट जाते है...
ऐैसे नागुजारों का साथ कतई न लेना..!
यह तो वह साप है, जो खुद के सपेरे को भी डंस जाते है...
राजनिती मे चंद पैसों के लिएे बिकने वाले कभी साथ-साथ नही चलते...
यह वह किनारों का किचळ होते है, जो अक्सर गंदगी से भरे रहते है. ‘ देखना राह ताक कर कदम को बढा़ना क्यूकी पैर मैले ही अपने होते है..!
#मॉबलिंचर
“ अॅड / प्रकाश आंबेडकरांचा पक्ष / संघटन व त्याचा वाढता प्रभाव पाहून वाह-वाही करणारे व मिरविणारे वेळेप्रसंगी पाठ दाखवणारे समझा ”
वंचित_बहूजन_आघाडी
महाराष्ट्र_विधानसभा_2019
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