गुरुवार, 31 अक्टूबर 2024

वार अॅड पीस

वार_अॅड_पीस
_लेव-तोलस्तोय
सन-1869 लिखी चार खंड वाला उपन्यास, जिसे लिखने के लिएे करीब 4 साल का वक्त लगा है.

राजनितिक / कुटनितिक / सामाजिक / धार्मिक / दार्शनिक / मानसिक / भावनात्मक व मनोवैज्ञानिक आदी के भाव वर्णन के साथ किताब का शिर्ष रुस कि जनता कि देशभक्ती , साहस , वीरता और दृढ़ता को दर्शाता है. जो नेपोलियन कि सेना के खिलाफ खडे रहे.

यह किताब महज इस बात के साथ खत्म नही होती तो वह स्त्रियो कि स्थिती, तथा पाखंडपुर्ण जिवन आदी का विरोध दर्शाती है.

प्रख्यात विद्वानों कि माने तो.
रुस के इवान तुर्गनेव सन - 1880
कहते है_ ‘ यह किताब एक महाकाव्य के समान है और यह महान लेखक कि महान रचना है,  यही असली रुस है

साथ ही
_चार्ल्स पेर्सी स्नो के साथ
अग्रेजी लेखक… _जॉन गाल्सवर्दी भी किताब के मानक थे

_फ्रांसिसी लेखक... _ रोमां रोली
इनका कहना यह रहा कि ‘ 19 वी शताब्धी का भव्य स्मारक,  उसका यह मुकूट माना है ’

फ्रांसिसी लेखक _फ्रांस्वा मोरिआक ( 1885-1970 ) भी किताब के पक्ष मे रहे.

वही _ एर्नेस्ट हेमेनगुए का कहना है ‘मेरी नजर में तो कोई भी ऐसा लेखक नही है, जिसने युद्ध के बारे मे तोलस्तोय से बेहतर लिखा हो  ’

_ थामस मान का कहना है कि “ युद्ध और शान्ती, युद्ध के संबंधं में विश्व कि सबसे सशक्त रचना है

वही लेनिन के हवाले से मैक्सिम गोर्की ने लिखा कि ‘ युरोप मे ऐैसा कोई लेखक नही जिसकी तुलना इससे कि जा सके
युरोप के साथ इस भारत मे भी इसका प्रकाशन किया गया. जिसका प्रथम हिंदी अनुवाद रुद्र नारायण अग्रवाल द्वारा इंडियन प्रेस इलाहबाद से मुद्राकिंत किया गया.
विशेष इसका हिंदी अनुवाद डॉ. मदनलाल मधू ने दिन के 6-8 घंटो के परिश्रम से पुरे 3 साल मे पुर्ण किया.

और ऐेसी ऐैतिहासिकता रखने वाली किताब को तथा व्यक्तींत्व को भारतीय न्याय प्रणाली आंतक कि परिभाषा मे रखकर कटघरे मे खडे कर एक इंन्सान को सवाल पुछती है..कि यह किताब दुसरे देश के युद्ध के बारे मे है,  यह तुम्हारे घर मे क्यो है .?

भारत स्वंयम युद्ध और शान्ती का सबसे बडा प्रतिक माना गया है..और वही
विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र वाले देश मे भारतिय न्याय प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खडा किया गया है!

📮 भारतिय पोष्ट

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